Hindi poem

कैसे ना मुड़ते ?

P.S. : Please use head phones 🙈

प्यार भरी आवाज़ की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ?

मद भरी निगाहों की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ?

किस नज़ारे पे अटकी थी नजर ?

ये देखने की चाह थी, कैसे ना मुड़ते ?

क्या मेरे मुस्कान से आंखों में थी कोई चमक?

ये देखने की चाह थी, तो कैसे ना मुड़ते ?

सागर जो आंखों में ना समा रहा था ,

उसके दिल में बसजाने की राह थी, तो कैसे ना मुड़ते ?

किनारा जो डूबने से बचा रहा था,

उस तक जा, नज़ारे के मजे लेने की राह थी यार ,

तो कैसे ना मुड़ते ?

तो बताओ , उनकी एक पुकार से हम कैसे ना मुड़ते ?

  • उलुपी

4 thoughts on “कैसे ना मुड़ते ?”

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