Hindi poem

कहां चला ?

चला है यूं आंखों में,
मंजर तू लेके !
दिल की पोटली में,
समंदर सा लेके !

किस नज़ारे की तरफ
है बढ़ता चला तू ?
क्यों समंदर में डूबने की
साजिश में है तू ?

संभालना, कहीं ना
नजरिए डूबा दे !
गहराई से बचना
ना जरिए दगा दे !

किस मोड़ पे थमना,
ये तय करलेना !
जितनी भरी है पोटली,
जरा खाली करलेना !

मिलेगी किसीको
फिर तुझसे नदिया भी !
खुशी से फिर गुजरेगी,
तेरी सदिया भी !

मिलजाएगी मंजिल तो,
रुकना जरासा !
क्योंकी हमेशा है बढ़ना,
और आगे जरासा !

- उलुपी

Photo by Roman Pohorecki from Pexels Thanks !

8 thoughts on “कहां चला ?”

  1. मिलजाएगी मंजिल तो,
    रुकना जरासा !
    क्योंकी हमेशा है बढ़ना,
    और आगे जरासा !
    ये पंक्तियां कुछ सिखाती है हम्हे अच्छा सा,
    आगे बढ़ने की आशा है देती हमेशा जरासा!

    ♥️

    Liked by 1 person

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