Hindi poem

अफसाना !

कई बार यूं होता है कि,
अफसाना बातों मै गुम होता है ।

कभी यादों में घुटता है ।
कभी रिवाजों में बंधता है ।

कई बार यूं होता है कि,
सन्नाटों में टहलता है ।

कभी हालातों से बहलता है ।
कभी डर से और पनपता है ।

कभी यूं भी होता है कि,
इरादे से डर जाता है ।

एक आवाज से भरमाता है ।
बस आंखो से छुप जाता है !

कभी यूं भी होता है कि, विश्वास से आगे आता है !     

सच्चाई के आगे फिर झुक जाता है !
अच्छाई से फिर वो न्याय पाता है !

कभी फिर यूं भी होता है कि,
अफसाना एक मिसाल बन जाता है !

– उलुपी

Photo by Suzy Hazelwood from Pexels
Thanks for the pic !

7 thoughts on “अफसाना !”

  1. बन्धु थोड़ा मात्रिक सुधार कर लें शेष अतिउत्तम है आपकी रचना। मुझे लगता है आप

    *कई बार यूँ होता है कहना चाह रहीं*

    Liked by 1 person

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