Hindi poem

शक्ति !

तू प्रेम है, तू मुक्ति है !कार्य की तू शक्ति है !बुद्धि, धैर्य, तू भक्ति है !तू छिनती आसक्ति है !मातृत्व की अभिव्यक्ति है !लक्ष्मी को जनती युक्ति है !आत्मबल की योगिनीतू योनी का सम्मान है !अष्टभुजा फलदायिनी,तू संसार का अभिमान है !भेद क्या इसे स्त्री, पुरुष का ?कण कण में विराजी शक्ति है !नाश… Continue reading शक्ति !

Hindi poem

मेरे यार !

तेरी गाली से भीहोता है, दिल खुश ।तेरी इक मुस्कान पेकुर्बान है, सब कुछ ! चाहे हो कहीं भी,दुआओ में हमेशा रहता है ।जो मिले तो , " थम जा "वक्त ये पल से कहता है ! छोड़ा है जब जबदुनिया ने मेरा साथ ,हाथो में हमेशा पाया,मैंने तेरा हाथ ! गलतियां दिखाई तुनेमिटाके खोकला… Continue reading मेरे यार !

Hindi poem

नारी !

नरक से भी बत्तर है,जहा नारी का सम्मान नही ! नारी तेरी जननी है ! वासना का सामान नही ! जैसी तेरी करनी है,वहा क्षमा का कोई स्थान नहीं ! बन जाएगी काली गर,उस मंजर से तू अनजान नहीं ! अभीभी समय है बदलजाक्या मा का प्यार याद नहीं ? स्त्रीत्व अंश तुझमें भी है… Continue reading नारी !

Hindi poem

अफसाना !

कई बार यूं होता है कि,अफसाना बातों मै गुम होता है । कभी यादों में घुटता है ।कभी रिवाजों में बंधता है । कई बार यूं होता है कि,सन्नाटों में टहलता है । कभी हालातों से बहलता है ।कभी डर से और पनपता है । कभी यूं भी होता है कि,इरादे से डर जाता है… Continue reading अफसाना !

Hindi poem

कहां चला ?

चला है यूं आंखों में,मंजर तू लेके !दिल की पोटली में,समंदर सा लेके ! किस नज़ारे की तरफहै बढ़ता चला तू ?क्यों समंदर में डूबने कीसाजिश में है तू ? संभालना, कहीं नानजरिए डूबा दे !गहराई से बचनाना जरिए दगा दे ! किस मोड़ पे थमना,ये तय करलेना !जितनी भरी है पोटली,जरा खाली करलेना !… Continue reading कहां चला ?

Hindi poem

इक गुफ्तगू !

इश्क़ में दान करना पड़ता है, जां को हलकान करना पड़ता है। और तजुर्बा मुफ्त में नहीं मिलता, पहले नुकसान करना पड़ता है। उसकी बे लब्ज गुफ़्तगू के लिये, आंख को कान करना पड़ता है। फिर उदासी के भी तक़ाज़े हैं, घर को बीरान करना पड़ता है। - मेहशार आफरीदी इश्क़ में समर्पण हो, तो… Continue reading इक गुफ्तगू !

Hindi poem

सुनो !

अंधेरे को रोशनी से भर देना.. किसी चांद को मुट्ठी मे रख लेना ! रोते हुए बस यूंही हस देना.. मिठाई सी बातों को चख लेना ! घुस्से मे प्यार भी कर कर देना.. तीखासा मरहम लगा लेना ! नाराजी में राजी करवा देना.. शायरी से इस दिल को समझा लेना ! कभी रूठे, तो… Continue reading सुनो !

Marathi poem

गुरवे नमः !

देह चालतोय अनेक वाटा , नाम ते भागविते , तृष्णा ह्याची ! पार करतोय अनेक लाटा , तो दाखवितो मार्ग , आहे कृष्णा ज्याची ! काढतोय माझ्या पायातील काटा , शक्तीचा उगम आहे छाया त्याची ! मनातील निघतो कुडा कचाटा , स्मरण ती होता , रूपं याची ! गुरु माऊली जरा बसा या पाटा ,… Continue reading गुरवे नमः !

Hindi poem

कैसे ना मुड़ते ?

P.S. : Please use head phones 🙈 प्यार भरी आवाज़ की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ? मद भरी निगाहों की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ? किस नज़ारे पे अटकी थी नजर ? ये देखने की चाह थी, कैसे ना मुड़ते ? क्या मेरे मुस्कान से आंखों में थी कोई चमक? ये देखने की… Continue reading कैसे ना मुड़ते ?

#shayari

जमीं और आसमां ✨

क्षितिज एक छलावा है ✨ Horizon is a Mirage ✨ Earth is protecting many .. but it can meet the sky only when it reaches the heights of sky. Sky is giving shelter to many but it can meet Earth only when it liquifies, changes its original state and rains over land . Earth and… Continue reading जमीं और आसमां ✨