Hindi poem

नफरत से कुर्बत तक !

तेरे बातों से निकली चुभन दिलपे लगी है..जो नफरत बढ़ाए ये कैसी दिल्लगी है ? हम बातोमे उलझने वाले नहीं है..बातोमे ही खयाल सुलझने वाले कहीं है ! खयालों से नफरत गर दिल में पलेगी..कुरबत की राहें फिर कैसे खिलेगी ? गर मुद्दों को फैसले बनाके चलोगे..हकीकत के सिलसिले से कैसे मिलोगे ! जो नजर… Continue reading नफरत से कुर्बत तक !