Hindi poem

कोई तो आसपास रहता है !

कोई हवाओं की तरह बहता है ।कोई दीवारों की कानो में कहता है ।कोई बन्द दरवाजों में सहता है ।आसपास कोई रहता है ! कोई पास होकर भी जूदा रहता है ।कोई दूर होकर भी जुड़ा रहता है ।कोई अपने में ही मस्त रहता है ।आसपास कोई रहता है ! कोई तुम्हे पाने बहता है… Continue reading कोई तो आसपास रहता है !

Hindi poem

अफसाना !

कई बार यूं होता है कि,अफसाना बातों मै गुम होता है । कभी यादों में घुटता है ।कभी रिवाजों में बंधता है । कई बार यूं होता है कि,सन्नाटों में टहलता है । कभी हालातों से बहलता है ।कभी डर से और पनपता है । कभी यूं भी होता है कि,इरादे से डर जाता है… Continue reading अफसाना !

Hindi poem

कहां चला ?

चला है यूं आंखों में,मंजर तू लेके !दिल की पोटली में,समंदर सा लेके ! किस नज़ारे की तरफहै बढ़ता चला तू ?क्यों समंदर में डूबने कीसाजिश में है तू ? संभालना, कहीं नानजरिए डूबा दे !गहराई से बचनाना जरिए दगा दे ! किस मोड़ पे थमना,ये तय करलेना !जितनी भरी है पोटली,जरा खाली करलेना !… Continue reading कहां चला ?

Marathi poem

गुरवे नमः !

देह चालतोय अनेक वाटा , नाम ते भागविते , तृष्णा ह्याची ! पार करतोय अनेक लाटा , तो दाखवितो मार्ग , आहे कृष्णा ज्याची ! काढतोय माझ्या पायातील काटा , शक्तीचा उगम आहे छाया त्याची ! मनातील निघतो कुडा कचाटा , स्मरण ती होता , रूपं याची ! गुरु माऊली जरा बसा या पाटा ,… Continue reading गुरवे नमः !