Hindi poem

मेरे यार !

तेरी गाली से भीहोता है, दिल खुश ।तेरी इक मुस्कान पेकुर्बान है, सब कुछ ! चाहे हो कहीं भी,दुआओ में हमेशा रहता है ।जो मिले तो , " थम जा "वक्त ये पल से कहता है ! छोड़ा है जब जबदुनिया ने मेरा साथ ,हाथो में हमेशा पाया,मैंने तेरा हाथ ! गलतियां दिखाई तुनेमिटाके खोकला… Continue reading मेरे यार !

Hindi poem

कैसे ना मुड़ते ?

P.S. : Please use head phones 🙈 प्यार भरी आवाज़ की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ? मद भरी निगाहों की पुकार थी, कैसे ना मुड़ते ? किस नज़ारे पे अटकी थी नजर ? ये देखने की चाह थी, कैसे ना मुड़ते ? क्या मेरे मुस्कान से आंखों में थी कोई चमक? ये देखने की… Continue reading कैसे ना मुड़ते ?